सोच

व्हीलचेयर में बैठे हुए एक गरीब बूढ़े से एक छोटे बच्चे ने पूछा, ” बाबा, आपका घर कहाँ है ?”ये पूरी दुनिया ही मेरा घर है, बच्चा | जहाँ जगह मिल जाए उसे ही अपना घर मान लेता हूँ”, अपनी लड़खड़ाती आवाज़ में बूढ़े ने कहा |

मैं वहाँ खड़ा, ये देखकर, सोच रहा था ये उसकी गरीबी बोल रही थी या उसकी दार्शनिकता |

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