चिट्ठी 

प्रिय मिनी,

कैसी हो ? आशा है, अच्छी होगी। कुछ दिन पहले तुम्हारा लैटर मिला, पढ़कर लगा कि मेरी छोटी बहन बड़ी हो गई है, मुझे समझने लगी है।
मुझे अच्छा व गर्व महसूस होता है जो तुम ‘वड्सवर्थ प्रोजेक्ट’ से जुड़कर बहुत ही नेक काम कर रहा हो। कितने बच्चे अपने पढ़ने के अधिकार से वंचित रह जाते है, उन बच्चों को पढ़ाना-लिखाना और सपने देखने के लिए प्रेरित करना बहुत सरहनीय काम है। जिसमें से एक ने पायलेट तो एक ने आर्ट टीचर बनने का सपना देखा है, जैसा तुमने बताया था अपने ब्लॉग में |

  जहाँ कुछ लोग ये मानते हैें की कि आज के युवा ‘सेल्फ़िश’ है, केवल अपना सोचते हैं, तो ये उनकी गलत धारणा है । और तुम, इस  बात का उदाहरण हो कि देश का हर युवक अपने तऱीके से देश को आगे बढ़ाने में  लगा हुआ है। 

आज 13 अक्टूबर को तुम्हारा बर्थडे है। उसकी बधाई इस पत्र द्वारा भी स्वीकार करो। मैं तुमसे सिर्फ 3 साल बड़ा हूँ। तो कोइ भारी-भरकम उपदेश दे  नहीं सकता। बस एक बात ज़रूर कहना चाहता हूँ कि तुम लाईफ़ में कभी भी असफलता से डरना नहीं। कभी असफलता मिल जाए तो बस एक ‘डेयरी मिल्क’ खरीदना और खा लेना। अपने असफलता का भी छोटा-सा ज़श्न मनाना, क्योंकि असफलता एक बेहतर गुरू है सफलता से। असफलता है क्या- सिर के बल खड़ी सफलता है और कुछ भी नहीं | असफलता राह के बाधक नहीं, माइल स्टोन हैं |  मैं नहीं चाहता की मेरी बहन कभी भी असफलता से डरे, हमेशा आगे बढ़ने की ही सोचे। अपने स्ट्यूडेन्ट को भी यह सीख देना कि वो भी असफलता को स्वीकार करें और उससे सीखकर आगे बढ़े | अंत में ‘तारे ज़मीन पर’ से कुछ लाईन तुम्हारे लिए

तु धूप है

छम्म से बिख़र

तु है नदी

ओ ! बेख़बर

उड़ चल कहीं

बह चल कहीं

दिल ख़ुश जहाँ

तेरी तो मंज़िल है वही”

उज्जवल भविष्य की शुभकामनाऐं।

                                                   तुम्हारा भाई

                                                    आयुष मौर्य

P.S. :- HAPPY BIRTHDAY MINI

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