First Diwali

On diwali night, the staccato of bursting crackers where disturbing them. They were disturbed and wanted to ask what sound is this.

Next morning, when their mother was feeding them, they know solace and calmness of the level they had received is nowhere to be found out.

And on this day they had celebrated their first diwali.

विन्सेंट वॉन गॉग

Source google

एक बात जाननी थी तुमसे

कि उस दिन

जब तुमने पिस्टल उठा कर

अपनी कनपटी में रखा था

और ट्रिगर दबा कर

एक शून्य को कंबल के भांति ओढ़ लिया था

तुम्हारे शरीर से निकले रक्त का रंग

लाल था या पीला?

मुझे लगता है पीला रहा होगा

तुम्हारी पूरी जिंदगी पीलापन से ही भरी हुई थी

और ट्रिगर दबाते ही

तुमने उनके छींटे

ज़मीन पर फैलाकर

फिर उसमें लेटकर

तुमने अपनी आख़री ‘सेल्फ-पोट्रेट’ बनाई होगी

बरसात

मालूम है मुझे

नाराज़ हो तुम मुझसे

और जायज़ भी है

की जब आई थी पिछली दफ़ा

तुम, मिलने मुझसे

मैं मौजूद ना था

और तुम्हें लौटना पड़ा था

बिना मुझसे मिले

तुम्हें मानने के लिए

मैंने तुम्हारे पसंदीदा पेड़ो के

बीज बोए हैं

मालूम है मुझे

आओगी तुम हर शाम

उनमें पानी डालने

उम्र की बरसी

#happybirthday

आज तुम्हारे उम्र की बरसी है

और जब इस साल

इसमें जोड़ना एक अंक

तो साथ ही साथ

जोड़ लेना इसमें

कुछ हसीन लम्हें

कुछ बेपरवाही मुस्कुराहटें

कुछ किताबें

कुछ शरारतें

इब्तिदा

डायरी का पन्ना

(9132वां दिन पृथ्वी पर)

12.10.2017. 08:36AM

Sunrise, river, birds

जब भी आप सूर्योदय देखते हैं एक नयापन का एहसास जरूर होता है। और उसे कैमरा में कैप्चर करने का मौका लग जाये तो क्या बात है। कल सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए निकला था तो ये विहंगम दृश्य देखने को मिला।

आज कुछ ख़ास है। जानना चाहेंगें क्या ख़ास है? आज मेरी माँ को माँ बने 25 साल हो गए। congratulation maa.

माँ से हमारी हर चीज़ जुड़ी होती है। अगर माँ को माँ बने 25 साल हो गए तो मैंने भी 25 पतझड़ पूरे कर लिए। पतझड़ इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि जन्मदिन पतझड़ में आता है तो हर साल पतझड़ ही पूरा करता हूँ।

पतझड़ एक नई शुरूआत लाता है। पुराने पत्ते गिराकर पेड़ अपने आप में नयापन लाने का आग़ाज़ करते हैं। पेड़ो से ये बात सीखने योग्य है। अमल करने का प्रयास भी जारी रहेगा। हर साल जब जन्मदिन आएगा तो सबकुछ नए सिरे से शुरुआत करूँगा। ये पतझड़ हर बरस मेरे जीवन में आये ये कामना है।

और हाँ आज एक पेड़ जरूर लगाऊंगा। वो मुझे पतझड़ के आने का संकेत हर बरस देते रहेंगे।


*इब्तिदा- शुरुआत

अमरत्व

डायरी का पन्ना

(रावण और टॉम आल्टर साहब)

तिथि 01.10.2017 वक़्त 10:37 AM

कल रावण दहन हो गया पर सिर्फ़ पुतलों का। जो हमने बनाया था, अपने अंदर के रावण को न मार पाने की असमर्थता के ख़ातिर। रावण तो कभी नहीं मरता दोस्त, उसे अमरत्व का वरदान मिला था। रावण हमेशा से अमर है।

कल ही टॉम आल्टर साहब चले गए। कहीं गए होंगे लौट आएंगे। ऐसे शख़्स बहुत दूर जाते नहीं। 12-15 साल पहले, टीवी पर इनकी कोई फ़िल्म आ रही थी और पापा ने मुझे बताया ये टॉम आल्टर हैं बहुत अच्छी उर्दू बोलते हैं। उस टाइम मूझे, ना सिनेमा का बहुत शौक़ था और उर्दू को सिर्फ़ मुसलमानों द्वारा बोली जाने वाली भाषा मानता था मैं। उस समय इसमें से किसी भी का शौक़ होता तो उस दिन ही मुरीद हो गया होता इनका।

कुछ सालों बाद…

जब यूट्यूब में हल्के नीले रंग का डेनिम की शर्ट पहने, सफ़ेद बाल और सफ़ेद दाढ़ी में उर्दू बोलते देखा तो मुरीद होने से रोक न पाया ख़ुद को। कभी मिला नहीं इनसे फ़िर भी जुड़ाव बराबर रहा। मेरे कॉलेज मैं टॉम आल्टर साहब आने वाले हैं किसी इवेंट में शिरक़त करने ऐसा सुना था पर ऐसा कुछ हुआ नहीं वरना मिलने की कसर भी पूरी हो जाती।

टॉम आल्टर साहब मर तो सकते नहीं क्योंकि वो भी अमर है।