बदलाव का

यह दौर है बदलाव का

पत्थरों के पथराव का

युवकों के भटकाव का

ख़ून के छिंटकाव का

चारों तरफ अलगाव का

जलती अलाव का

इंसानियत पर गहराते दबाव का

यह दौर है बदलाव का

क्या वाकई ये दौर है बदलाव का?

विन्सेंट वॉन गॉग

Source google

एक बात जाननी थी तुमसे

कि उस दिन

जब तुमने पिस्टल उठा कर

अपनी कनपटी में रखा था

और ट्रिगर दबा कर

एक शून्य को कंबल के भांति ओढ़ लिया था

तुम्हारे शरीर से निकले रक्त का रंग

लाल था या पीला?

मुझे लगता है पीला रहा होगा

तुम्हारी पूरी जिंदगी पीलापन से ही भरी हुई थी

और ट्रिगर दबाते ही

तुमने उनके छींटे

ज़मीन पर फैलाकर

फिर उसमें लेटकर

तुमने अपनी आख़री ‘सेल्फ-पोट्रेट’ बनाई होगी

इब्तिदा

डायरी का पन्ना

(9132वां दिन पृथ्वी पर)

12.10.2017. 08:36AM

Sunrise, river, birds

जब भी आप सूर्योदय देखते हैं एक नयापन का एहसास जरूर होता है। और उसे कैमरा में कैप्चर करने का मौका लग जाये तो क्या बात है। कल सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए निकला था तो ये विहंगम दृश्य देखने को मिला।

आज कुछ ख़ास है। जानना चाहेंगें क्या ख़ास है? आज मेरी माँ को माँ बने 25 साल हो गए। congratulation maa.

माँ से हमारी हर चीज़ जुड़ी होती है। अगर माँ को माँ बने 25 साल हो गए तो मैंने भी 25 पतझड़ पूरे कर लिए। पतझड़ इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि जन्मदिन पतझड़ में आता है तो हर साल पतझड़ ही पूरा करता हूँ।

पतझड़ एक नई शुरूआत लाता है। पुराने पत्ते गिराकर पेड़ अपने आप में नयापन लाने का आग़ाज़ करते हैं। पेड़ो से ये बात सीखने योग्य है। अमल करने का प्रयास भी जारी रहेगा। हर साल जब जन्मदिन आएगा तो सबकुछ नए सिरे से शुरुआत करूँगा। ये पतझड़ हर बरस मेरे जीवन में आये ये कामना है।

और हाँ आज एक पेड़ जरूर लगाऊंगा। वो मुझे पतझड़ के आने का संकेत हर बरस देते रहेंगे।


*इब्तिदा- शुरुआत

पेन्सिल

रंगबेरंगी पेंसिलों

वो जो तुम

सफ़ेद पन्नों में

जो काले अक्षर लिखती हो

वो कालापन किसका है?

क्या वो तुम्हारे ख़ून का रंग है?

जो अब काला पड़ गया है

कि जिस दिन तुम्हें पकड़कर लिखने वाले

से तुम्हें अलग कर दिया गया था

तुमने आँसू बहाए और ख़ून काला कर लिया

और अब जब मैं तुम्हें पकड़कर लिखता हूँ

तो जमी हुई ख़ून से बनी तुम्हारी नोंक

आँसुओ में भीगकर

मुलायम और काफ़ी कमज़ोर हो गयी है

और लिखते ही टूट जाती है

बार-बार तुम्हें छीलकर

तुम्हारी हैसियत इतनी कम कर दी है

की तुम मौजूद तो हो पर किसी काम की नहीं

हिन्दी दिवस

सबसे पहले तो आप सबको हिंदी दिवस की बधाई।

आज हिंदी दिवस है तो स्वभाविक है बात हिंदी की ही होगी और उसके मॉडर्न स्वरूप से भी परिचित होंगे।

सबसे पहले तो ये बात जान लेना ज़रूरी है कि हिंदी हमारे संविधान में मौजूद 22ऑफिसियल लैंग्वेज में से एक भाषा है, अर्थात सभी भारतीयों की मातृभाषा नहीं है। हिंदी बोलने से आप कुछ ज्यादा भारतीय नहीं बन जाते हैं। आप भारत की कोई भाषा बोल सकते है। किसी पर भी ज़बरदस्ती हिंदी बोलने के लिए बाध्य करना गलत है। हर भाषा का अपना महत्व है और सब कोई को इसे समझना होगा।

आजकल कुछ हिंदी पंडित (जोकि हिंदी में ही हस्ताक्षर करना, हिंदी में ही नाम लिखने मात्र से हिंदी की सेवा करने का सोचते हैं) हिंदी में अंग्रेज़ी शब्दों के घुस जाने से घबराते हैं और उसकी निंदा भी करते हैं। पर मेरा ये मत है कि भाषा तो सदैव बदलती रही है और बदलती रहनी चहिये, ये उसकी जीवंत होने का प्रमाण है। हिंदी तो हमेशा से बदलती रही है । अलग-अलग काल की हिंदी एक-दूसरे से अलग है। भक्ति काल की अलग और उसके पहले और बाद की काल की अलग। 400-500 साल पहले लिखी गयी महाकाव्य ‘रामचरितमानस’ तुलसीदास जी ने अवधि मे लिखी है जोकि आज की हिंदी से काफ़ी अलग है।और हाँ तुलसीदास को ‘शेक्सपियर ऑफ ईस्ट’ कहना बहुत घटियापन है। तुलसीदास, तुलसीदास हैं और शेक्सपियर, शेक्सपियर हैं। दोनों ही महान लेखक हैं और उनकी तुलना करना घटियापन है।

हिंदी ने विभिन्न भाषाओं के शब्दों को शामिल किया है जिनमें कुछ तो ऐसा हैं जिन्हें हम संस्कृत से ली हुई समझते थे पर पता चला कि वो कही और से ली गयी हैं। मसलन से ऐनक। ऐनक अरबी भाषा से आया हुआ शब्द है। पर स्कूल में हिंदी के अक्षर से परिचित हुए तो ऐनक से ही हुए। कितने सारी भाषाओं ने हिंदी को समृद्ध किया है, फिर अंग्रेज़ी से नफ़रत क्यों? हिंदी-अंग्रेज़ी ने एक दूसरे के शब्द भंडार को समृद्ध किया है। जब अंग्रेज़ी ने हिंदी के शब्द को अपने शब्दकोश में जगह दी तो क्या हिंदी को भी नही करना चाहिए ऐसा। हिंदी के शब्द जैसेकि जंगल,ओम, गुरु, चूड़ीदार, लूट,आदि जैसे शब्दों से अंग्रेज़ी ने अपनी भाषा की फैलाव में महत्वपूर्ण स्थान दिलवाया की ये दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा बन गयी। क्या हिंदी की लिए भी ऐसे प्रयास नहीं होना चहिये? हाँ ये बात जरूर बोलना चाहूंगा कि अंग्रेज़ी शब्दों को बातचीत में सिर्फ़ इसलिए पेलना की उससे आप ज्यादा बुद्धिमान माने जायेंगे तो ये गलत है। अंग्रेज़ी भाषा बुद्धिमता नापने का मापक नहीं है।

हिंदी विश्व की चौथी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है और ये प्रमाणित करता है कि हिंदी सम्पर्क भाषा के रूप में विकसित हुई है। और अगर घटिया राजनीति की शिकार ना हुई होती तो और भी ज्यादा फैलती विश्व भर मे। इसे कैसे सशक्त बनाया जाये इस पर भी बात कर ली जाये

1. आजकल आपके मोबाइल में भाषा का विकल्प ENGLISH (INDIA) देखा होगा। और आप ने इसी भाषा का चुनाव किया होगा। ENGLISH(INDIA) का अर्थ ये है कि अंग्रेज़ी अब फॉरेन लैंग्वेज नही रही अब इसका भारतीयकरण कर दिया है हमने। इसे बड़ा कदम माना जाना चाहिए। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए अंग्रेज़ी विरोधी ताक़तें कमज़ोर होंगी और दोनों भाषा परस्पर सहयोग से समृद्ध होंगी।

2. हिंदी को साइंस, टेक्नोलॉजी, फैशन, ऑटोमोबाइल, आदि क्षेत्रों मे इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

3.उर्दू ज़बां के लिए ‘जश्न-ए-रेख़्ता’ जैसे कार्यक्रम का सफ़ल होना ये दर्शता है कि लोग भाषा को लेकर अभी भी जुड़ाव महसूस करते हैं। युवाओं में उर्दू के प्रति क्रेज़ बढ़ती हुई नज़र आई है। ऐसे प्रयास सभी भारतीय भाषाओं के साथ किया जाना चाहिए।

4.ज्यादातर भारतीय दो या दो से अधिक भाषाओं को जानते हैं और उनमें निपुण होते हैं। अगर हम ‘ट्रांसलेशन’ पर ध्यान दे तो हिंदी में कई भाषाओं के साहित्य उपलब्ध होंगे और हिंदी की उत्कृष्ट साहित्य दूसरे भाषाओं मे। हमे ये कार्य भारी मात्रा मे करना होगा।

5. टेक्नोलॉजी की मदद से हिंदी को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना होगा। हाल ही में गूगल ने एड चलकर लोगों को ये बताया कि आपको अब सर्च करने के लिए आपको मज़बूरन कोई और भाषा सीखनी नहीं पड़ेगी आप सर्च हिंदी में भी कर सकते हैं। टेक्नोलॉजी को कैसे हिंदी के लिए उपयोग किया जाए इस बार चर्चा करना होगा।

हिंदी को इस तरह अपनाना होगा की ये तरह का swag लगे ख़ासकर युवाओं के बीच। वो ‘C’ से ही ‘Cool’ ना हो ‘क’ से भी ‘कूल’ लगें

मेरे ये विचार आपको कैसे लगे नीचे कमेंट्स करके बताइयेगा जरूर।

अंत में एक बार फिर आप सबको हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें ।