विन्सेंट वॉन गॉग

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एक बात जाननी थी तुमसे

कि उस दिन

जब तुमने पिस्टल उठा कर

अपनी कनपटी में रखा था

और ट्रिगर दबा कर

एक शून्य को कंबल के भांति ओढ़ लिया था

तुम्हारे शरीर से निकले रक्त का रंग

लाल था या पीला?

मुझे लगता है पीला रहा होगा

तुम्हारी पूरी जिंदगी पीलापन से ही भरी हुई थी

और ट्रिगर दबाते ही

तुमने उनके छींटे

ज़मीन पर फैलाकर

फिर उसमें लेटकर

तुमने अपनी आख़री ‘सेल्फ-पोट्रेट’ बनाई होगी

पेन्सिल

रंगबेरंगी पेंसिलों

वो जो तुम

सफ़ेद पन्नों में

जो काले अक्षर लिखती हो

वो कालापन किसका है?

क्या वो तुम्हारे ख़ून का रंग है?

जो अब काला पड़ गया है

कि जिस दिन तुम्हें पकड़कर लिखने वाले

से तुम्हें अलग कर दिया गया था

तुमने आँसू बहाए और ख़ून काला कर लिया

और अब जब मैं तुम्हें पकड़कर लिखता हूँ

तो जमी हुई ख़ून से बनी तुम्हारी नोंक

आँसुओ में भीगकर

मुलायम और काफ़ी कमज़ोर हो गयी है

और लिखते ही टूट जाती है

बार-बार तुम्हें छीलकर

तुम्हारी हैसियत इतनी कम कर दी है

की तुम मौजूद तो हो पर किसी काम की नहीं